Brand: Rajkamal Prakashan
Product Code: RKP141
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Buy Urvashi: Dinkar Granthmala, RKP141, Sahitya Sarowar

गीत आता है मही से? या कि मेरे ही रुधिर का राग यह उड़ता गगन में ? बुलबुलों-सी फोटने लगतीं मधुर स्मर्तियाँ ह्रदय में; ययद आता है मदिर उल्लास में फूला हुआ वन, याद आते हैं तरंगित अंग के रोमांच, कम्पन; स्वर्णवर्णा वल्लरी में फूल-से खिलते हुए मुख, याद आता है निशा के ज्वार में उन्माद का सुख | कामनाएँ प्राण को हिल्कोरती हैं | चुम्बनों के चिन्ह जग पड़ते त्वचा में ||राष्ट्रकवि 'दिनकर' छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओं में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति। वे संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू के भी बड़े जानकार थे। वे 'पद्म विभूषण' की उपाधि सहित 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार', 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' आदि से सम्मानित किए गए थे।.

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